Effective treatment of Spermatorrhea धातु रोग का असरदार इलाज

Effective treatment of Spermatorrhea धातु रोग का असरदार इलाज

धातु रोग की शिकायत में मल या मूत्र के दौरान जरा-सा भी जोर लगाने पर, उसी समय गुप्तांग के मुख से वीर्य की बूंद टपकने लगती है या लार निकलने लगती है। जिनका वीर्य किसी न किसी वजह से पतला बन चुका होता है और इन्द्री की नसें भी कमजोर व ढीली पड़ चुकी होती हैं, उन्हें ज्यादा धातु रोग की शिकायत होती है। अधिकतर ये देखा गया है कि जिन लोगों में धातु या धात गिरने की शिकायत होती है, उनमें स्वप्नदोष की समस्या एक आम समस्या है। यहां तक कि कुछ लोगों में तो अंडरवियर की रगड़ लगने से भी धात गिर जाता है।
ऐसी स्थिति में गुप्तांग की नसों में पतले वीर्य को रोकने की क्षमता नहीं रहती और थोड़ा-सा दबाव पड़ने की स्थिति में वीर्य टपकने व बहने लगता है, जिसके अधिक समय तक गिरने से व्यक्ति की कमर-शरीर व पिंडलियों में दर्द महसूस होने लगता है। उठते-बैठते चक्कर व कमजोरी की अनुभूति होती है, जिससे वह अपना रोजाना का काम-काज भी पूरी चुस्ती-फुर्ती से नहीं कर पाता।
ऐसी स्थिति में जब वह इधर-उधर के भ्रमित कर देने वाले विज्ञापनों पढ़कर ताकत-जवानी वाले किसी क्लिनिक या दवाखाने में जाता है, तो वहां उसे बिना सोचे-विचारे कुछ बाजारू उत्तेजक दवाईयां दे दी जाती हैं। उसके वास्तविक रोग की जड़ को जानने की कोई कोशिश नहीं की जाती। सही मायनों में धातु रोग का सही इलाज वही होता है, जो पहले वीर्य की बर्बादी को रोके और ताकत को शरीर में संभालने की क्षमता पैदा करे। उसके बाद ही ताकत बढे़गी।

आप पढ़ रहे हैं धातु रोग का इलाज

धातु रोग के कारण :

  • दिमागी तौर पर बीमार व्यक्ति, जो अनर्गल रूप से कई प्रकार की परेशानियों से घिरा रहता है या किसी दुख में डूबा रहता है, इस प्रकार के व्यक्तियों के शरीर में स्थित धातुएं दूषित होकर धातु पतली हो जाती है और व्यक्ति धातु दुर्बलता से पीडि़त हो जाता है।
  •  व्यक्ति को कोई ऐसी बीमारी जो काफी लम्बे समय से चली आ रही हो या फिर शारीरिक कमजोरी की वजह से भी व्यक्ति को धातु रोग हो जाता है।
  • उचित मात्रा में पौष्टिक भोजन जैसे- दूध, दही, मेवा, पौष्टिक आहार, दालें आदि का सेवन नहीं करता, तब शरीर में रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र का पर्याप्त मात्रा में निर्माण नहीं हो पाता, जिससे व्यक्ति की धातु पतली और कमजोर होकर वीर्य पतला हो जाता है, जिस वजह से धातु कमजोरी या धात गिरना शुरू हो जाता है।
  • बहुत ज्यादा मात्रा में मिर्च मसाले वाला भोजन खाने से भी धातु दुर्बलता या धातु रोग हो जाता है।
  • कामेच्छा बढाने वाले पदार्थों का सेवन जैसे- लहसुन का ज्यादा सेवन करना, मांस , मदिरा, चाय, कॉफी आदि का ज्यादा सेवन करने से भी व्यक्ति की धातु दुर्बल या स्नायु दुर्बल होती है और व्यक्ति धातु रोग से पीडि़त हो जाता है।

आप पढ़ रहे हैं धातु रोग का इलाज

धातु रोग के लक्षण :
धातु रोग के कारण व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोरी और थकान महसूस करने लगता है। उसके स्वभाव में रूखापन व चिड़चिड़ापन आ जाता है और शरीर में कई प्रकार के रोग पैदा हो जाते हैं। धातु रोग के शिकार व्यक्ति का शरीर जल्दी ही सूखने लगता है। इसके अलावा सेक्स में जोश की कमी , सभी शारीरिक अंगों में थकान, दुखी व परेशान, काम में मन न लगना, उदासी, पेट के रोग, श्वास , खांसी, स्नायु दुर्बलता आदि रोग हो जाते हैं।

धातु रोग का घरेलु उपचार :

  • सफेद मुसली धातु रोग बहुत लाभदायक है, इसलिए रोज 10 ग्राम सफेद मुसली का चूर्ण, देसी गाय के दूध के साथ लगातार प्रयोग करने से धातु रोग ठीक हो जाता है। इस प्रयोग का उपयोग जब तक धातु रोग ठीक न हो जाए, तब तक किया जा सकता है।
  • धातु रोग में नीमगिलोय(गिलोय जो नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई हो) रामबाण औषधि और अचूक उपचार साबित होती है। सबसे पहले नीमगिलोय की कच्ची डंठल को छाया में सुखा लंे, अच्छी तरह सूखने के बाद इमामदस्ते में इसे कूट कर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का प्रयोग 5 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ रोज 45 दिन तक करने से जरूर ही धातु रोग में आराम मिलता है साथ ही स्नायु कमजोरी में भी काफी लाभदायक है।

आप पढ़ रहे हैं धातु रोग का इलाज

अन्य उपचार :

  • रोज एक गिलास पपीते का ज्यूस पीने से धातु रोग में काफी फायदा पहुंचता है।
  • कच्चे आंवले का रस निकाल लें, इस रस को सुबह खाली पेट शहद के साथ पीने से धातु रोग में राहत मिलती है।
  • उड़द की दाल के आटे को गाय के देसी घी में भून कर और इसमें देसी खांड मिलाकर इसके लड्डू बना लें। इन लड्डुओं का रोज सेवन करने से धातु रोग चला जाता है।
  • तुलसी के 3 ग्राम बीजों को रोज दोपहर के खाने के बाद मिश्री मिलाकर सेवन करने से पक्के तौर फायदा होता है।
  • इलायची, बादाम और जावित्री को मक्खन और शक्कर के साथ रोज प्रयोग करें, धातु रोग में लाभ पहुंचेगा।
  • सुबह उठते ही लहसुन की कच्ची कलियों का भैंस के दूध के साथ रोज 15 दिन तक सेवन करें, धातु रोग ठीक होगा।
  • बाजार में मिलने वाले, अश्वगंधा और शतावरी को मिश्रण बनाकर रोज सेवन करने से भी धातु दुर्बलता ठीक हो जाती है।
  • सर्दियों के मौसम में कौंच पाक का सेवन धातु रोग में बहुत लाभकारी है। इसके साथ आप धातु पौष्टिक चूर्ण का भी प्रयोग कर सकते हैं।

उपरोक्त लेख में हमने कई प्रकार से धात् रोग के विषय में चर्चा और उसके उपाय के विषय में बातें की। मगर धात् रोग का घरेलू इलाज या उपचार तब सफल होगा, जब आप घरेलू नुस्खे अपनाने, अच्छी डाइट और रेग्युलर एक्सर्साइज रुटीन अपनाने के साथ-साथ कुछ स्वस्थ जीवनशैली वाली आदतें भी अपनायेंगे।

आपने पढ़ा और जाना धातु के इलाज और उपचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *