Dhatu Rog Or Dhatu Durbalta Ko Kare Door धातु रोग और धातु दुर्बलता को करें दूर

Dhatu Rog Or Dhatu Durbalta Ko Kare Door धातु रोग और धातु दुर्बलता को करें दूर

Dhatu Rog Or Dhatu Durbalta Ko Kare Door

धातु रोग-

धातु रोग में पुरूष का वीर्य बिना कामेच्छा के निकल(वीर्य का रिसना व बहना) जाता है। ज्यादातर ऐसा स्वप्न में या फिर मल-मूत्र त्याग के दौरान होता है।

धातु दुर्बलता-

शारीरिक या मानसिक असंतुलन में शरीर के अंदर शुक्र का निर्माण नहीं हो पाता है। परिणाम स्वरूप शरीर तेजहीन उदास एवं निकम्मा हो जाता है। इस स्थिति में यदि धातु(शुक्र) बनता भी है, तो अत्यधिक पतला होता है, जो पुरूषत्व शक्ति से भरपूर नहीं होता और रोगी संभोग में सक्षम नहीं होता है, जिससे रोगी धातु दुर्बलता के साथ-साथ हीनभावना से भी ग्रस्त हो जाता है।

धातु दुर्बलता की चिकित्सा-

1. शुक्रमेह में अर्जुन की छाल या श्वेत चंदन का क्वाथ पीने से लाभ होता है।

2. इमली के बीजों को रात को पानी में भिगो दें। सवेरे छिल-पीसकर बराबर गुड़ मिलाकर 6-6 ग्राम की गोलियां बना लें। 1-1 गोली सुबह-शाम लेने से वीर्य का पतलापन दूर होकर पुरूषार्थ में वृद्धि होती है। यह सस्ता उत्तमोत्तम योग है।

3. बिनौले की मींगी को दूध में खीर बनाकर खाने धातु की दुर्बलता और मस्तिष्क की कमजोरी में लाभ होता है।

4. शीतल मिर्च, इलायची, वंशलोचन और मिश्री समान भाग लेकर चूर्ण बना लें। 10-10 ग्राम दूध के साथ नित्य सुबह-शाम लेने से वीर्य संबंधी रोग दूर हो जाते हैं।

5. कलमीशाक(करीमसाग) धातु दौर्बल्य रोगियों के लिए उत्तम है। यह शुक्रजनक है।

6. काई को मिट्टी के ठीकरे में आग पर रखकर भस्म बना लें। भस्म में बराबर मिश्री मिलाकर पीस लें। 4 ग्राम गाय के दूध के साथ नित्य लेने से वीर्य का पतलापन ठीक हो जाता है।

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7. नागरबेल(पान) के साथ लौह भस्म लेने से वीर्य और कांति की वृद्धि होती है।

8. कामवर्धक वटी- सोने का वर्क 1 ग्राम, कस्तूरी 2 ग्राम, केशर 3 ग्राम, चांदी के वर्क 3 ग्राम, छोटी इलायची के बीज 2 ग्राम, जायफल 4 ग्राम, वंशलोचन 7 ग्राम, जायपत्री 8 ग्राम। सबको अच्छी प्रकार पीसकर तीन दिन तक बकरी के दूध में और तीन दिन तक नागरबेल को पान के रस में घोंटकर 250 मि.ग्रा. की गोलियां बना लें। 1-2 गोली मलाई के साथ नित्य लेने से धातुक्षीणता दूर होकर प्रबल कामोद्दीपन होता है।

9. गंगरेन की जड़ की छाल के चूर्ण में समान मात्रा में मिश्री चूर्ण मिला लें। 10-10 ग्राम नित्य सुबह-शाम दूध के साथ लेने से वीर्य का गाढ़ापन होकर कामशक्ति में वृद्धि होती है।

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10. अढ़ुल(गुड़हल) के पुष्पों को मिश्री के साथ पीस घांेट कर नित्य सुबह-शाम लेने से वीर्य की कमजोरी दूर होती है।

11. नवीन गुग्गल वीर्य-वर्धक और बलकारक है। पुराना गुग्गल शरीर को दुर्बल बनाता है।

12. गोरखमुण्डी के चूर्ण को शक्कर के साथ लेने से वीर्य की कमजोरी दूर होती है।

13. धतूरे के बीज और काली मिर्च को पानी में पीसकर काली मिर्च के बराबर गोलियां बना लें। 1-1 गोली सुबह-शाम अर्क सौंफ के साथ लगातार 21 दिन लेने से पुराने से पुराना अनैच्छिक वीर्यस्राव ठीक हो जाता है। खटाई और बादी(गैस करने वाली) चीजों से परहेेज करें।

14. घी और मिश्री के साथ प्रवाल भस्म नित्य लेने से धातु पुष्ट होता है।

15. बड़(बरगद) के क्वाथ या रस को गाढ़ा करके उसमें पौष्टिक औषधियों को मिलाकर लेने से वीर्य का पतलापन और मूत्रकृच्छता में लाभ होता है।

16. बबूल का गोंद 4.5 ग्राम को गाय के घी 15 ग्राम में मिलाकर 7 दिन तक चाटने से धातुस्राव में लाभ होता है।

17. बचो(लेटिन नाम त्नइपं ज्पदबजवतपं) की जड़ का चूर्ण 1-2 ग्राम मिश्री मिले दूध के साथ सुबह-शाम लेने से धातुपतन और धातु का पतलापन ठीक हो जाता है।

18. बादाम की गिरी 30 ग्राम मिश्री के साथ रात को सोते समय लेने से स्नायुविक शक्ति की वृद्धि होती है और नये वीर्य की उत्पत्ति एवं शोधन होता है।

19. बहुफली के सेवन से वीर्य की वृद्धि होती है, शरीर पुष्ट होता है और इन्द्रियों में नवीन बल उत्पन्न होता है।
सेवन विधि इस प्रकार है- बहुफली के ताजा पौधों को थोडे़ पानी के साथ पीसकर कपड़े में दबाकर रस निकाल लें। यह रस 1 औंस लेकर उसमें शक्कर 10 ग्राम और पीपर का चूर्ण 750 मि.ग्रा. मिलाकर नित्य सुबह-शाम दें।

20. बड़ भस्म को नागरबेल पान के साथ लेने से वीर्य की वृद्धि होती है।

21. बाराहीकन्द(महावीर्य) उत्तम वीर्यवर्धक हैै। इसका चूर्ण 3-3 ग्राम सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ लेने से लाभ होता है।

22. बेर की गुठली की गिरी को गुड़ के साथ मिलाकर लेने से वीर्य की वृद्धि होती है और वीर्य पुष्ट होता है।

23. सालम लाहौरी, सालम मिश्री की ही एक जाति(वनस्पति) है। इसके कन्द के चूर्ण की फंक्की लेने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

24. सिंघाड़े के आटे की दूध के साथ फंक्की लेने या उसका हलवा बनाकर खाने से वीर्य की वृद्धि होती है।

25. क्षीर काकोली का कन्द शतावर जैसा होता है। इसका चूर्ण 3-5 ग्राम मिश्री मिले दूध के साथ लेने से वीर्य की वृद्धि होती है। इससे स्त्रियों में दूध की वृद्धि होती है।

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