Dhatu Rog Ko Dur Karne Ka Desi Ayurvedic Upchar

Dhatu Rog Ko Dur Karne Ka Desi Ayurvedic Upchar

धातु रोग, शुक्रपात (Spermatorrhoea)

अत्यधिक कामवासना जागने पर अथवा उत्तेजित होने पर पुरूष के गुप्तांग में स्वतः ही कड़ापन(तनाव) आ जाता है और पुरूष संभोग के लिए लालायित होने लगता है। इस स्थिति में पुरूष के शिश्न के अग्र भाग में पानी के रंग जैसा पतला व चिपचिपा तरल(लेस) प्रदर्शित होने लगता है, किन्तु इसकी मात्रा बहुत कम होने की वजह से यह पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाता व टपकता नहीं है। लेकिन जब व्यक्ति बहुत समय तक उत्तेजित अवस्था में रहता है, तो ये लेस शिश्न के मुख के ऊपरी हिस्से में आ जाता है, जिसको ‘Male G Spot’ कहा जाता है।

आज के युग में अनैतिक सोच और अश्लीलता के बढ़ने के कारण युवक और युवती अक्सर अश्लील फिल्में देखते हैं, अश्लील गंदे साहित्य पढ़ते हैं, खूबसूरत स्त्रियों के आपत्तिजनक चित्र देखते हैं और फिर कामवासना जागने पर आप्राकृतिक तरीके से अपने वीर्य और रज को नष्ट करते रहते हैं।

ऐसा अधिक बार और लगातार करते रहने से एक समय ऐसा भी आता है, जब हालत इतनी ज्यादा खराब हो जाती है, कि किसी खूबसूरत लड़की या स्त्री की कल्पना मात्र ही वीर्य तुरन्त निकल जात है। ये एक प्रकार का रोग है, जिसे शुक्रमेह कहते है। यूं तो पुरूष के गुप्तांग से निकलने वाले इस द्रव्य रूपी लेस में वीर्य का कोई भी अंश प्राप्त नहीं होता है। दरअसल इस लेस का काम पुरुष यौन-अंग की नाली को चिकना और गीला करने का होता है जो संभोग के दौरान वीर्य की तीव्र गति से होने वाले नुकसान से शिश्न को सुरतिक्षत रखता है।

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धातु रोग के मुख्य कारण-

Dhatu Rog Ko Dur Karne Ka Desi Ayurvedic Upchar

1. ज्यादा उत्तेजक और अश्लील विचारों में डूबे रहना।

2. मन का बेचैन रहना।

3. अधिकतर समय किसी दुःख को गले लगाये रहना।

4. मानसिक कमजोरी होना।

5. बाॅडी में पोषक पदार्थो और तत्वों व विटामिन्स की कमी हो जाने पर।

6. कोई रोग होने के कारण ज्यादा दवाई लेने पर।

7. शारीरिक दुर्बलता और बाॅडी में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाना।

8. वीर्य का पतलापन व कमजोर होना।

9. लिंग की नसों का कमजोर होना।

10. अत्यधिक हस्तमैथुन करना।

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धात रोग के लक्षण-

1. मल-मूत्र त्याग के दौरान यदि दबाव की इच्छा महसूस हो, तो यह धात रोग का लक्षण है।

2. शिश्न के अग्रभाग(मुख द्वार) से लार का टपकना।

3. वीर्य का पानी के समान पतला होना।

4. शारीरिकि रूप से कमजोरी महसूस होना।

5. मामूली घटना व बात पर भी चिंता में आ जाना।

6. पूरी बाॅडी या बाॅडी के अन्य पार्टस(भागों) में कंपकंपी महसूस होना अथवा हाथ-पैरों का कांपना।

7. उदर(पेट) की बीमारियों से परेशान रहना, पेट का साफ न होना, कब्ज की शिकायत रहना।

8. श्वास रोग या खांसी होना।

9. शरीर की पिंडलियों में दर्द की शिकायत।

10. हल्का या तेज सिर चकराना।

11. शारीरिक थकावट महसूस होना।

12. शरीर में आलस्य महसूस करना।

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धात रोग के आयुर्वेदिक उपाय-

गिलोय : धातु रोग में आराम पाने के लिए रोगी को 2 चम्मच गिलोस के रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करायें, बहुत लाभ मिलेगा।

आँवले : 2 चम्मच आँवले के रस को शहद के साथ रोजाना सुबह खाली पेट रोगी को दें। इस उपाय से धातु बलवर्धक और गाढ़ा होता। इसके अलावा यदि आँवले के चूर्ण को दूध में मिलाकर रोगी को सुबह-शाम सेवन कराया जाये, तो इससे रोगी को बहुत जल्दी धात गिरने की समस्या में लाभ पहुंचता है।

तुलसी : धात रोग के रोगी को दोपहर का भोजन करने के बाद 3 से 4 ग्राम तुलसी के बीज और जरा-सी मिश्री मिलाकर देने से तीव्र आराम पहुंचता है।

Dhatu Rog Ko Dur Karne Ka Desi Ayurvedic Upchar

सफेद मुसली : धातु गिरने की समस्या में सफेद मुसली बहुत उपयोगी होती है। आप ऐसा करें कि 10 ग्राम सफेद मूसली का चूर्ण लें और इसमें मिश्री मिलाकर पीड़ित को सेवन करायें। इसके उपरान्त ऊपर से लगभग आधा किलो गाय का दूध पीने को दें। इस उपाय से शारीरिक कमजोरी(आंतरिक और बाहरी) नष्ट होगी और व्यक्ति की बाॅडी में रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ेगी। यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी बढ़ोत्तरी होगी।

उड़द की दाल : धातु रोग में शीघ्र और गजब का आराम पाने के लिए उड़द की दाल को पीसकर उसे खांड में भुन लें और रोगी को सेवन करायें।

जामुन की गुठली : धूप में अच्छे से सुखायी हुई जामुन की गुठलियों को एकत्र करें और उनका चूर्ण व पाउडर बना लें। इस तैयार चूर्ण को दूध के साथ रोजाना सेवन करने से कुछ ही हफ्तों में धात गिरने की समस्या समाप्त हो जाती है।

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