धातु रोग की समस्या का उपचार Dhatu Rog Ki Samasya Ka Upchar

धातु रोग की समस्या का उपचार Dhatu Rog Ki Samasya Ka Upchar

धातु गिरना:
बिना इच्छा के अपने आप वीर्य का निकल जाना ही धातु रोग कहलाता है। मूत्र के दौरान वीर्य निकल जाने की समस्या भी ऐसे रोगी के अंदर देखी जाती है।
जब किसी पुरुष का लिंग उत्तेजित अवस्था में होता है यानी कठोर हो जाता है, तो उस दौरान जरा-सी मात्रा में उसके लिंग में से पानी के रंग जैसा पतला-सा द्रव्य निकलता है। इस द्रव्य की मात्रा इतनी कम होती है कि यह द्रव्य बाहर नहीं आ पाता। मगर जब अधिक समय तक पुरुष का लिंग उत्तेजना में रहता है, मगर वह सेक्स नहीं करता, तो यह द्रव्य या लेस, लिंग के मुख द्वार तक पहुंच जाता है।
इस द्रव्य में वीर्य का जरा सा भी अंश नहीं होता है। कुदरत ने इसे केवल सेक्स के दौरान लिंग की नली को गीला करने के लिए बनाया है, ताकि सेक्स के दौरान जब वीर्य तीव्रता से निकले, तो लिंग छिल न जाए। कई युवक किशोरावस्था से हस्तमैथुन या अन्य हथकंडो द्वारा अपने वीर्य की बबार्दी में लग जाते हैं या फिर काल्पनिक रूप से मन ही मन किसी खूबसूरत स्त्री या लड़की के विचारों में डूबे रहते है, तो उनमे यह पतला द्रव्य(लेस) काफी अधिक मात्रा में बहने लगता है। यहां तक कि कुछ समय के बाद तो स्थिति यह बन जाती है कि किसी लड़की का ख्याल आते ही या फिर मन ही मन उसके साथ कामुक हरकत करने की बात सोचते ही, लिंग में से यह लेस स्वयं ही अधिक मात्रा में निकलने लगती है और उत्तेजना पूरी तरह शांत हो जाती है। इस प्रकार की समस्या को में शुक्रमेह(धातु गिरना) कहते हैं।

धातु रोग(शुक्रमेह) की जानकारी-
– धातु गिरने की समस्या में रोगी को सबसे पहले इस चीज को ध्यान में रखना चाहिए कि उसका वीर्य दिन में किस अवधि में, कितनी बार और किस रंग का निकलता है, जैसे- लेसदार, पानी के रंग का, दूध के रंग का, पतला या गाढ़ा।
मूत्र से पूर्व वीर्य निकलता है या फिर मूत्र के बाद निकलता है या तब निकलता है, जब मन में कामुक विचार आने लगते हैं और संभोग करने को मन होता है। अगर इस रोग में वीर्य तब निकलता है, जब आप खाना खा लेते हैं, तो खाना खाने के कितनी देर बाद ऐसा होता है, ये भी ध्यान में रखना चाहिए रोगी को। यदि मल-मूत्र के दौरान वीर्य निकलता है, तो क्या कब्ज की स्थिति में ऐसा होता है, इन बातों से रोग की विभिन्न स्थितियों का पता लगता है।

– यदि आप भोजन करने से लगभग 3-4 घंटे पूर्व मूत्र त्याग करते हैं और मूत्र गाढ़ा आता है, तो समझ लें कि पाचन शक्ति खराब है। पेशाब में गाढ़ापन की समस्या, ज्यादा गरिष्ट भोजन करने से और पाचनतंत्र के कमजोर होने से आ जाती है, जिसे फास्फेटस् कहा जाता है। यदि पाचन-तंत्र के सही हो जाने के पश्चात् पेशाब में वीर्य निकलने की समस्या समाप्त हो जाती है, तो पेशाब का रंग पीला हो जाना इसका लक्षण होता है।

– जब कोई ऐसा रोगी, जिसे पेशाब में वीर्य जाने की समस्या है, किसी चिकित्सक के पास इसकी जांच के लिए जाता है, तो कई चिकित्सक उस रोगी से कह देते हैं कि अपने पेशाब को एक शीशी में भरकर रख लें। यदि उस दो-तीन 2-3 घंटे के बाद शीशी के अंदर तल में कोई पदार्थ बैठ जाता है, तो समझ जाना कि तुम्हें शुक्रमेह(धातु गिरना) रोग है। मगर इस प्रकार की जांच किसी भी प्रकार से सही नहीं है, क्योंकि अगर भोजन नहीं पचता, तो वह भी नीचे ही बैठ जाता है। रोगी व्यक्ति के पेशाब में यह अनपचा भोजन अधिक होता है और स्वस्थ व्यक्ति में कम। यह बात गलत है कि यह वीर्य ही होता है।

– मल-मूत्र के दौरान कभी भी अधिक दबाव या जोर नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि ज्यादा जोर लगाने से वीर्याशय पर जोर पड़ता है। शौच के दौरान जितनी शोच स्वयं से सरला पूर्वक निष्कासित हो जाए, उतना ही सही रहता है उसके बाद उठ जाना चाहिए। यदि ऐसी स्थिति आ जाये कि आपको दिन में 2-3 बार शौच के लिए जाना पड़ जाए, तो इसमें घबराने की कोई बात नहीं है।

– आप युवा हैं और आपको स्वप्नदोष की समस्या नहीं है, परन्तु फिर भी कभी-कभार आपको ऐसा महसूस हो कि मूत्र के दौरान आपको वीर्य निकल रहा है, तो इस स्थिति में चिंता करने की कोई बात नहीं है, क्योंकि स्वस्थ पुरूषों के साथ भी कभी-कभार ऐसा हो जाता है।

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धातु रोग का उपचार-
1. सलाद में रोजाना कच्चा प्याज खाएं। प्याज को काटने के बाद तुरन्त खा लेना चाहिए, यंू पड़े रहने देना नहीं चाहिए। कटे प्याज को 10 से 20 मिनट के अंदर खा लेना सही होगा। हर रोज शहद के मिश्रण के साथ प्याज का रस पियें। सफेद प्याज का इस्तेमाल करेंगे, तो और भी सही रहेगा।
2. 1 चम्मच सफेद प्याज का रस, आधा चम्मच गाय का घी, डेढ़ चम्मच आंवले का रस, 1 चम्मच अदरक का रस, 1 चम्मच शहद लें। इस मिश्रण को रात के समय सोने से पहले पी जाएं। नपंुसकता रोग को दूर करने में भी ये प्रयोग सफल होता है, अगर लगातार 100 दिनों तक करे तों।

3. पानी अधिक पिएं और जितना हो सके तरल पदार्थों का सेवन करें, ताकि मल-मूत्र के दौरान अधिक जोर या दबाव न लगाना पड़े। कोशिश करें कि कब्ज न रहे आपको।

4. वीर्य गाढ़ा करने के लिए: 3 ग्राम सफेद मूसली, 12 ग्राम इसबगोल की भूसी, 3 ग्राम सलाम मिस्री, 400 ग्राम दूध और स्वादानुसार मिसरी मिलाकर खीर बनायें और ठंडी होने दें। इसके बाद चांदी भस्म 0.06 ग्राम और फौलाद भस्म 0.12 ग्राम मिलकर खाएं। दो बार करें ऐसा दिन में। अगर 45 दिन तक नियमित रूप से ऐसा करेंगे, तो वीर्य गाढ़ा हो जाएगा। ये सामग्री किसी पंसारी की दुकान में मिल जायेंगी।

5. वीर्य आसानी से न बहे, इसका उपाय: पीपल, सोंठ, अकरकरा, लौंग, सफेद चन्दन, केशर, जावित्री को 12-12 ग्राम लें। 48 ग्राम शुद्ध अफीम लें। अब इन सब साम्रगी को मिलाकर अच्छे पीसे लें और चूर्ण बना लें। इस चूर्ण के 1/4 ग्राम(0.25 ग्राम ) को 1/7 ग्राम शहद में मिलाकर मिश्री युक्त दूध के साथ खाएं।

6. इन्द्रीय के नसों की कमजोरी दूर करने का उपाय: एक छोटी मटकी लें और उसमें शहद भर लें। लगभग 30 मिनट तक अपनी इन्द्रीस को डुबो दें। इसके बाद इन्द्रिय निकाल कर साफ कपड़े से साफ कर लें। 10 मिनट तक अब इस पर गाय के घी की मालिश करें। नियमित 30 दिनों तक लगातार ऐसा करें। इस बात का ध्यान रखें कि इस प्रयोग के दौरान ना तो हस्तमैथुन करें और ना ही संभोग करें। ऐसा करने से इन्द्रिय की नसें सशक्त हो जायेंगी और पुरानी ताकत लौट आएगी।
7. वीर्य गाढ़ा करने के लिए रोजाना कच्चे नारियल का सेवन करें।
8. अश्लील या उत्तेजना पहुंचाने वाली सामग्री से दूर रहें। जैसे- अश्लील फोटो, पोर्न, अश्लील साहित्य से दूर रहें और ना ही इन सबसे संबंधित किसी भी विचार को अपने मन में पलने दें।

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